Meri Dinacharya In Hindi Essay Writing

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती को बनाए रखना एक व्यक्ति को स्वस्थ और अच्छाई की सामान्य स्थिति में रहने में मदद करते हैं। यह बिना थके या बिना आराम के शारीरिक गतिविधियों को करने की क्षमता प्रदान करता है। यद्यपि, स्वास्थ्य और तंदरुस्ती को बनाए रखने के लिए सन्तुलित भोजन के साथ नियमित शारीरिक व्यायाम की आवश्यकता होती है। तंदरुस्त, स्वस्थ, बीमारियों से निडर रहने और अन्य बहुत से लाभों के लिए, अपने स्वास्थ्य और तंदरुस्ती को बनाए रखना बहुत आवश्यक है।

आजकल, शिक्षक अपने विद्यार्थियों में हिन्दी लेखन कौशल और ज्ञान को बढ़ाने के साथ ही जागरुकता फैलाने के लिए आमतौर पर पूरा निबंध या कुछ पैराग्राफ लिखने के लिए देते हैं। स्वास्थ्य और तंदरुस्ती पर निबंध निम्नलिखित है, जो स्वास्थ्य और तंदरुस्ती पर छोटे निबंध व बड़े निबंधों की श्रेणी में विद्यार्थियों की अपने कार्य को पूरा करने में मदद करने के लिए लिखे गए हैं। सभी स्वास्थ्य और तंदरुस्ती पर निबंध बहुत ही आसान शब्दों में लिखे गए हैं। इसलिए, आप इनमें से कोई भी निबंध अपनी आवश्यकता और जरुरत के अनुसार चुन सकते हैं।

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती पर निबंध (हेल्थ एंड फिटनेस एस्से)

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती पर निबंध 1 (100 शब्द)

अच्छे स्वास्थ्य और तंदरुस्ती वाला एक व्यक्ति अपना जीवन पूरे उत्साह के साथ जीता है। एक व्यक्ति के लिए शारीरिक और मानसिक रुप से स्वस्थ होना स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। स्वस्थ और तंदरुस्त लोगों को बीमारियों का खतरा कम रहता है। तंदरुस्त होने का अर्थ केवल शारीरिक रुप से फिट रहना नहीं है, बल्कि इसका अर्थ एक व्यक्ति की स्वस्थ मानसिक स्थिति से भी है। यदि कोई शारीरिक रुप से तंदरुस्त है, तो वह स्वस्थ मानसिक स्थिति को भी प्राप्त कर सकता है।

स्वस्थ और तंदरुस्त रहने का साधारण तरीका नियमित व्यायाम और सन्तुलित भोजन के साथ ही तनाव मुक्त रहना है। वे लोग जो अपना वजन सन्तुलित रखते हैं, उन्हें हृदय और स्वास्थ्य संबंधित अन्य समस्याएं कम होती है। शारीरिक रुप से सक्रिय रहने वाले लोग आसानी से मन को शान्त स्थिति में रख सकते हैं। स्वस्थ और तंदरुस्त व्यक्ति अपने जीवन के सभी उतार-चढ़ावों का आसानी से सामना कर सकते हैं और किसी भी गंभीर या कठोर परिवर्तन से कम प्रभावित होते हैं।

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती पर निबंध 2 (150 शब्द)

बदलते समय के साथ लोग अपने स्वास्थ्य और तंदरुस्ती के प्रति अधिक जागरुक हो गए हैं। पुरुष अच्छा मांसल शरीर पाना चाहते हैं, वहीं महिलाएं दुबला पतला शरीर पाना चाहती हैं। पूरी तरह से फिट शरीर प्राप्त करने के लिए सभी दैनिक आधार पर बहुत अधिक संघर्ष कर रहे हैं। स्वस्थ और तंदरुस्त शरीर और मन प्राप्त करने के लिए बहुत अधिक अभ्यास, समय, प्रतिबद्धता, लक्ष्य, विश्वास और संघर्ष का सामना करने के लिए मजबूत मन की आवश्यकता होती है।

कुछ लोगों के पास अपनी तंदरुस्ती को बनाए रखने की क्षमता स्वंय होती है हालांकि, कुछ को नियमित व्यायाम और आहार का ध्यान रखने के लिए अच्छे योग्य प्रशिक्षक की भी आवश्यकता होती है। वे लोग जो कंपनियों के कारोबार में है, वे बहुत कम चलते-फिरते हैं और पूरे दिनभर में बहुत अधिक बैठते हैं। यही कारण है कि, वे मोटापे, अधिक वजन, आलस्य और थके होने की समस्या का सामना अधिक करते हैं। अध्ययन बताते हैं कि, वे लोग जो तंदरुस्त और स्वस्थ है, वे अपने जीवन में अधिक सफलता प्राप्त करते हैं।

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती पर निबंध 3 (200 शब्द)

स्वास्थ्य सभी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण आयाम है। किसी भी मनुष्य के लिए स्वास्थ्य और तंदरुस्ती के अलावा कुछ भी अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। स्वस्थ और तंदरुस्त लोग वास्तव में बहुत खुश और शान्तिपूर्ण जीवन जीने का आनंद लेते हैं। अस्वस्थ लोग अपने जीवन को पूरे उत्साह के साथ नहीं जीते हैं। वह अपने जीवन में कुछ भी खाने, खेल देखने, या जीवन के अन्य आरामों का आनंद नहीं ले पाते हैं। हमारे बड़ों के द्वारा सही कहा गया है कि, स्वास्थ्य ही धन है। अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए हमें अपने चारों ओर साफ-सफाई और स्वच्छता की सही देखभाल करने की आवश्यकता होती है। हमें समय पर स्वस्थ और पूरा भोजन खाना चाहिए।

हमें हरी और ताजी सब्जियाँ, दूध, ताजे फल, अंडा आदि खाना चाहिए। हमारे शरीर को प्रोटीन, खनिज और विटामिन की दैनिक आधार पर स्वस्थ और तंदरुस्त रहने के लिए पर्याप्त मात्रा की आवश्यकता होती है। स्वास्थवर्धक भोजन और शारीरिक गतिविधियों के साथ, हमें व्यक्तिगत सफाई के साथ ही अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता को बनाए रखने की आवश्यकता होती है। शारीरिक और मानसिक तंदरुस्ती एक व्यक्ति के सफल होने और समाज में अच्छा करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य और तंदरुस्ती के बारे में महात्मा बुद्ध के द्वारा सही कहा गया है कि, “शरीर के स्वास्थ्य को अच्छा रखना हमारा कर्तव्य है, अन्यथा हम अपने मन को मजबूत और स्पष्ट रखने में सक्षम नहीं होंगे।”


 

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती पर निबंध 4 (250 शब्द)

बहुत से आम लोग स्वास्थ्य और तंदरुस्त रहने के महत्व को कभी भी महसूस नहीं कर पाते हैं। वे आमतौर पर, अच्छे स्वास्थ्य के महत्व को कम आंकते हैं, क्योंकि वे इसके लाभों को कभी नहीं जानते हैं। हम सभी जानते हैं कि, स्वास्थ्य ही धन है लेकिन कुछ ही लोग अपने जीवन में इसका पालन करते हैं। स्वस्थ और तंदरुस्त रहना, हमारे दैनिक कार्यों को पूरा करने में मदद करता है। स्वस्थ्य रहना का अर्थ बीमारी रहित शरीर का ही होना नहीं है, बल्कि तनावमुक्त मन का होना भी है। यदि एक व्यक्ति अस्वस्थ मन रखता है, तो वह अपने शरीर को स्वस्थ नहीं रख सकता है। शरीर और मन दोनों का अच्छा स्वास्थ्य जीवन में सफलता प्राप्त करने और पूरे उत्साह के साथ आनंद करने में मदद करता है। अच्छा मानसिक स्वास्थ्य हमें अच्छा महसूस करता है और स्वस्थ शरीर शारीरिक क्षमता और आत्मविश्वास प्रदान करता है। अच्छा शारीरिक स्वास्थ्य हमारी परेशानी के समय में मदद करता है, वहीं बेकार या खराब शारीरिक स्वास्थ्य हमें अधिक कमजोर बनाता है और हमारे लिए बीमारियों का खतरा बढ़ाता है।

हमें अपने शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने के लिए सभी बिन्दुओं के बारे में जागरुक होने की आवश्यकता है। कुछ लोग बहुत अच्छे से जानते हैं कि, अपने शरीर को साफ-सुथरा और स्वस्थ कैसे रखा जाता ही हालांकि, उनके मन में कुछ परेशानियाँ चलती रहती है, जिसके कारण उन्हें स्वस्थ रहने के लाभ नहीं मिल पाते हैं। मानसिक तनाव धीरे-धीरे शारीरिक स्वास्थ्य को कमजोर कर देता है और शरीर को कमजोर बना देता है। वे लोग जो अपने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है और आलस्य करना, अस्वास्थ्यकर भोजन करना और गतिहीन जीवन को नजरअंदाज करते हैं।

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती पर निबंध 5 (300 शब्द)

आजकल, लोग अपने व्यस्त जीवन-शैली में बहुत व्यस्त हो गए हैं और उनके पास खुद को स्वस्थ या तंदरुस्त रखने का भी समय नहीं है। यह सत्य है कि, हमें स्वस्थ और तंदरुस्त रहने के लिए स्वास्थ्यवर्धक खाना चाहिए, अपने आस-पास स्वच्छता रखने का अभ्यास करना चाहिए और नियमित शारीरिक व्यायाम करना चाहिए। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि, कठोर परिश्रम का कोई भी विकल्प नहीं है, इसी तरह, स्वास्थ्य और तंदरुस्ती का भी कोई अन्य विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य और तंदरुस्ती स्वस्थ रहन-सहन और स्वस्थ जीवन-शैली का मिश्रण है। स्वस्थ और तंदरुस्त रहने के लिए व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य का भी स्वस्थ रहना आवश्यक है। हमें शारीरिक रुप से स्वस्थ रहने के लिए नियमित स्वास्थ्यवर्धक भोजन करना चाहिए और शारीरिक व्यायाम करना चाहिए हालांकि, हमें मानसिक रुप से स्वस्थ रहने के लिए सकारात्मक सोचने की आवश्यकता होती है।

हमें आत्म-प्रेरणा के साथ ही तंदरुस्ती की जीवन-शैली की गतिविधियों में भाग लेने की आवश्यकता होती है। हमें अपने स्वास्थ्य को प्रतिदिन की दिनचर्या के रुप में लेना चाहिए। स्वस्थ्य जीवन शैली के लिए स्वस्थ्य रहना हमारा सबसे बड़ा और पहला उद्देश्य होना चाहिए। इसके लिए घंटों व्यायाम की जरुरत नहीं है, नियमित रुप से प्रतिदिन थोड़ी-सा व्यायाम और स्वस्थ भोजन स्वास्थ्य और तंदरुस्ती को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है। हमें हमेशा अपनी आँखों को खुला रखना चाहिए और लिफ्ट के स्थान पर सीढियों को चुनना चाहिए, पास के क्षेत्रों में कार या बाइक के स्थान पर साइकिल का प्रयोग करना चाहिए, बस स्टॉप के लिए चलकर जाना चाहिए आदि गतिविधियाँ बहुत अधिक अन्तर का निर्माण करती है। नियमित शारीरिक व्यायाम में शामिल होना न केवल हमें तंदरुस्त रखता है, बल्कि हमारी जीवन-शैली और स्वस्थ जीवन में भी सुधार करता है। यह हमारे ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है और इस प्रकार, हमारे आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।

हमें सुबह के घूमने, दौड़ने, जिम (व्यायामशाला) में व्यायाम करने, या अन्य शारीरिक गतिविधियों का शरीर के कार्यकरण को ठीक से कार्य कराने के साथ ही मांसपेशियों में सुधार करने के समय का आनंद लेना चाहिए। हमें पाचन संबंधी विकारों से दूर रहने के लिए, रखे हुए या पैक भोजन के स्थान पर ताजी पके हुए भोजन को करना चाहिए।


 

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती पर निबंध 6 (400 शब्द)

परिचय

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती का आशय शारीरिक और मानसिक दोनों का अच्छी स्थिति में होने की स्थिति से है। नियमित व्यायाम और सन्तुलित भोजन एक व्यक्ति के स्वास्थ्य और तंदरुस्ती को सुधार सकते हैं। एक व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक अच्छाई के रुप में हम स्वास्थ्य को परिभाषित कर सकते हैं। यह केवल बीमारियों, रोग या दुर्बलता की अनुपस्थिति नहीं है। हम किसी भी व्यक्ति की तंदरुस्ती को वातावरण के अनुकूल मिलने वाली माँगों की क्षमता के रुप में परिभाषित कर सकते हैं।

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती को कैसे बनाया जाए

स्वंय को स्वस्थ और तंदरुस्त रखने के लिए, हम नियमित रुप से निम्नलिखित तरीकों को अपना सकते हैं:

  • हमें अपनी व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर नियमित रुप से दैनिक शरीरिक व्यायाम में शामिल होना चाहिए। दैनिक आधार पर 30-60 मिनट का व्यायाम या सप्ताह में 5 से 6 बार व्यायाम, किसी भी व्यक्ति के तंदरुस्त रहने के लिए पर्याप्त है।
  • एक व्यक्ति के लिए सही समय पर सही मात्रा में स्वस्थ और स्वच्छ आहार स्वस्थ और तंदरुस्त रहने के लिए बहुत आवश्यक है। स्वस्थ पोषण के साथ उच्च फाइबर, कम वसा, अधिक प्रोटीन और विटामिन व मिनरल (खनिज) के स्रोत अच्छे स्वास्थ्य के नींव है।
  • तंदरुस्त और स्वस्थ रहने के लिए, सोने की अच्छी व्यवस्था किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत आवश्यक है। हमें अपनी दैनिक दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखने और सोने की सही प्रक्रिया को अपनाने की आवश्यकता है, जो सही समय पर शुरु और खत्म होना चाहिए। हर रात आठ घंटे क नींद लेना हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को सुधारता है और हृदय संबंधी रोगों से बचाव करने के साथ ही मानसिक स्थिति को सुधारता है। अपर्याप्त नींद की व्यवस्था नींद से जुड़ी परेशानियों और विभिन्न मानसिक विकारों का नेतृत्व करती है।

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती का महत्व

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो बहुत खुशी और शान्ति के साथ जीवन जीना चाहते हैं। एक स्वस्थ और तंदरुस्त व्यक्ति ही पूरे उत्साह के साथ जीवन जीने में सक्षम होता है। हम एक व्यक्ति को स्वस्थ और तंदरुस्त तब कह सकते हैं, यदि वह शारीरिक और मानसिक रुप से तंदरुस्त है। शारीरिक और मानसिक रुप से तंदरुस्त व्यक्ति को बीमारियों का खतरा कम रहता है। किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य और तंदरुस्ती निम्नलिखित चीजों में मदद करती है:

  • बीमारियों के खतरे को कम करना (उच्च रक्त दाब, मधुमेह, हृदय संबंधी बीमारियाँ, पेट का कैंसर, हड्डियों में कमजोरी, मोटापा, ब्रेस्ट कैंसर, आदि)।
  • शारीरिक और मानसिक रुप से बेहतर महसूस कराना।
  • आत्मविश्वास के स्तर को सुधारना।
  • घावों को जल्दी भरना।
  • जीवन में सालों को जोड़कर आयु को लम्बी करने में मदद करना।
  • तनाव को कम करना और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
  • तनाव का स्तर, चिन्ता और अवसाद की भावना को कम करना।

निष्कर्ष

सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए विशेषरुप से युवा पीढ़ी के लिए नियमित शारीरिक गतिविधियाँ और नियमित व्यायाम बहुत आवश्यक है। स्वास्थ्य और तंदरुस्ती जीवन में खुशियाँ लाती है और एक व्यक्ति की तनावमुक्त और बीमारी मुक्त जीवन जीने में मदद करती है।

 


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सभी के लिये खुशहाल और एक सफल जीवन जीने के लिये अनुशासन बहुत ही जरुरी है। यहाँ पर हम कुछ संख्याओं में आपके स्कूल जाने वाले बच्चों के लिये निबंध उपलब्ध करा रहें है। सामान्यत: स्कूलों में विद्यार्थीयों को अनुशासन पर निबंध लिखने को दिया जाता है। अत: आप दिये गये निबंधों का प्रयोग किसी भी प्रतियोगिता आदि में कर सकते हैं।

अनुशासन पर निबंध (डिसिप्लिन एस्से)

Get below some essays on Discipline in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

अनुशासन पर निबंध 1 (100 शब्द)

हर एक के जीवन में अनुशासन सबसे महत्पूर्ण चीज है। बिना अनुशासन के कोई भी एक खुशहाल जीवन नहीं जी सकता है। कुछ नियमों और कायदों के साथ ये जीवन जीने का एक तरीका है। अनुशासन सब कुछ है जो हम सही समय पर सही तरीके से करते हैं। ये हमें सही राह पर ले जाता है।

हम अपने रोजमर्रा के जीवन में कई प्रकार के नियमों और कायदों के द्वारा अनुशासन पर चलते हैं। इसके कई सारे उदाहरण हैं जैसे हम सुबह जल्दी उठते हैं, एक ग्लास साफ पानी पीते हैं, तरोताजा होने के लिये शौचालय जाते हैं, दाँत साफ करते हैं, स्नान करते हैं, नाश्ता करते हैं, स्कूल जाते हैं आदि सभी अनुशासन का ही एक प्रकार है।

अनुशासन पर निबंध 2 (150 शब्द)

जीवन के सभी कार्यों में अनुशासन अत्यधिक मूल्यवान है। हमें हर समय इसका पालन करना है चाहे वो स्कूल, घर, कार्यालय, संस्थान, फैक्टरी, खेल का मैदान, युद्ध का मैदान या दूसरी जगह हों। ये खुशहाल और शांतिपूर्णं जीवन जीने की सबसे बड़ी जरुरत है। ये हमें ढेर सारे बड़े मौके देती है, अनुशासन आगे बढ़ने के लिये सही रास्ता देती है, जीवन में सही बातें सीखाती है, कम समय में ज्यादा अनुभव मिलता है आदि। जबकि अनुशासन की कमी की वजह से ढेर सारी दुविधा और गड़बड़ी होती है, अनुशासनहीनता की वजह से जीवन में शांति और प्रगति के बजाय ढेर सारी परेशानी उत्पन्न हो जाती है।

अनुशासन अपने बड़ों, ऑफिस के सीनीयर, शिक्षक, और माता-पिता के हुक्म का पालन करना है जिससे हम सफलता की ओर आगे बढ़ते हैं। हमें नियमों पर चलने की, आज्ञा का पालन करने की और सही तरीके से व्यवहार करने की जरुरत है। हमें अपने जीवन में अनुशासन के महत्व को समझना चाहिये। जो लोग अनुशासनहीन होते हैं वो अपने जीवन में बहुत सारी समस्याओं को झेलते हैं साथ ही निराश भी होते हैं।

अनुशासन पर निबंध 3 (200 शब्द)

अनुशासन किसी भी कार्य को ठीक ढंग से करने का एक तरीका है। इसके लिये आपके शरीर और दिमाग पर एक नियंत्रण की जरुरत होती है। कुछ लोगों के पास स्व-अनुशासन प्राकृतिक संपत्ति के रुप में होता है जबकि कुछ को इसे अपने अंदर विकसित करना पड़ता है। अनुशासन में वो दक्षता है कि वो भावनाओं को नियंत्रित कर सकता है और मुश्किलों से पार पाने के साथ ही सही समय पर सही कार्य करने में मदद करता है। बिना अनुशासन के जीवन अधूरा और असफल है। अपने बड़ों और वरिष्ठों का सम्मान करने के द्वारा हमें कुछ नियमों का पालन करना चाहिये।

ये जीवन के सभी कार्यों के लिये एक महत्वपूर्णं यंत्र है चाहे वो घर, कार्यालय, खेल का मैदान या दूसरी जगह हो। अगर हम अनुशासन का पालन न करें तो हमारा जीवन अव्यवस्थित हो जायेगा। इस दुनिया में हर चीज अनुशासित है और अनुशासन के द्वारा संगठित है। हवा, पानी और जमींन हमें जीवन जीने का रास्ता देते है। ये दुनिया, देश, समाज, समुदाय आदि सबकुछ बिना अनुशासन के असंगठित हो जायेगा क्योंकि सब कुछ अनुशासन पर निर्भर है। अनुशासन एक स्वभाव है जो प्रकृति द्वारा प्रदत्त सभी चीजों में उपस्थित है।


 

अनुशासन पर निबंध 4 (250 शब्द)

अनुशासित व्यक्ति आज्ञाकारी होता है और उसके पास उचित सत्ता के आज्ञा पालन के लिये स्व-शासित व्यवहार होता है। अनुशासन पूरे जीवन में बहुत महत्व रखता है और जीवन के हर कार्यों में इसकी जरुरत होती है। यह सभी के लिये आवश्यक है जो किसी भी प्रोजेक्ट पर गंभीरता से कार्य करने के लिये जरुरी है। अगर हम अपने वरिष्ठों की आज्ञा और नियमों को नहीं मानेंगे तो अवश्य हमें परेशानियों का सामना करना पड़ेगा और असफल भी हो सकते हैं।

हमें हमेशा अनुशासन में होना चाहिये और अपने जीवन में सफल होने के लिये अपने शिक्षक और माता-पिता के आदेशों का पालन करना चाहिये। हमें सुबह जल्दी उठना चाहिये, निययमित दिनचर्या के तहत साफ पानी पीकर शौचालय जाना चाहिये, दाँतों को साफ करने के बाद नहाना चाहिये और इसके बाद नाश्ता करना चाहिये। बिना खाना लिये हमें स्कूल नहीं जाना चाहिये। हमें सही समय पर स्वच्छता और सफाई से अपना गृह-कार्य करना चाहिये। हमें कभी भी अपने माता-पिता की बातों का निरादर, नकारना या उन्हें दुखी नहीं करना चाहिये। हमें अपने स्कूल में पूरे यूनिफार्म में और सही समय पर जाना चाहिये। कक्षा में स्कूल के नियमों के अनुसार हमें प्रार्थना करना चाहिये। हमें अपने शिक्षकों की आज्ञा का पालन करना चाहिये, साफ लिखावट से अपना कार्य करना चाहिये तथा सही समय पर दिये गये पाठ को अच्छे से याद करना चाहिये।

हमें शिक्षक, प्रधानाध्यापक, चौकीदार, खाना बनाने वाले या विद्यार्थियों से बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिये। हमें सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिये चाहे वो घर, स्कूल, कार्यालय या कोई दूसरी जगह हो। बिना अनुशासन के कोई भी अपने जीवन में कोई भी बड़ी उपलब्धि प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिये अपने जीवन में सफल इंसान बनने के लिये हमें अपने शिक्षक और माता-पिता की बात माननी चाहिये।

अनुशासन पर निबंध 5 (300 शब्द)

अनुशासन एक क्रिया है जो अपने शरीर, दिमाग और आत्मा को नियंत्रित करता है और परिवार के बड़ों, शिक्षकों और माता-पिता की आज्ञा को मानने के द्वारा सभी कार्य को सही तरीके से करने में मदद करता है। ये एक ऐसी क्रिया है जो अनुशासन में रह कर हर नियम-कानून को मानने के लिये हमारे दिमाग को तैयार करती है। हम अपने दैनिक जीवन में सभी प्राकृतिक संसाधनों में वास्तविक अनुशासन के उदाहरण को देख सकते हैं। सूरज और चाँद का सही समय पर उगना और अस्त होना, सुबह और शाम का अपने सही समय पर आना और जाना, नदियाँ हमेशा बहती है, अभिभावक हमेशा प्यार करते हैं, शिक्षक हमेशा शिक्षा देते है और भी बहुत कुछ। तो फिर क्यों हम अपने जीवन में पीछे हैं, बिना परेशानियों का सामना किये आगे बढ़ने के लिये हमें भी अपने जीवन में सभी जरुरी अनुशासन का पालन करना चाहिये।

हमें अपने शिक्षक, अभिभावक और बड़ों की बातों को मानना चाहिये। हमें उनके अनुभवों के बारे में उनसे सुनना चाहिये और उनकी सफलता और असफलता से सीखना चाहिये। जब भी हम किसी चीज को गहराई से देखना और समझना शुरु करते हैं, तो ये हमें जीवन में महत्वपूर्ण सीख देता है। मौसम अपने सही समय पर आता और जाता है, आकाश बारिश करता है और रुकता है आदि सभी सही समय होती हैं जो हमारे जीवन को संतुलित बनाती है। इसलिये, इस धरती पर जीवन चक्र को कायम रखने के लिये हमें भी अनुशासन में रहने की जरुरत है। हमारे पास अपने शिक्षक, अभिभावक, पर्यावरण, परिवार, वातावरण और जीवन आदि के प्रति बहुत सारी जिम्मेदारियां हैं। मानव होने के नाते हमारे पास सोचने-समझने का, सही-गलत के बारे में फैसला करने के लिये और अपनी योजना को कार्य में बदलने के लिये अच्छा दिमाग है। इसलिये, अपने जीवन में अनुशासन के महत्व और जरुरत को जानने के लिये हम अत्यधिक जिम्मेदार हैं।

अनुशासनहीनता की वजह से जीवन में ढेर सारी दुविधा हो जाती है और व्यक्ति को गैर-जिम्मेदार और आलसी बना देता है। ये हमारे विश्वास के स्तर को कम करती है और आसान कार्यों में भी व्यक्ति को दुविधाग्रस्त रखती है। जबकि अनुशासन में होने से ये हमें जीवन के सबसे अधिक ऊंचाईयों की सीढ़ी पर ले जाती है।


 

अनुशासन पर निबंध 6 (400 शब्द)

अनुशासन कुछ ऐसा है जो सभी को अच्छे से नियंत्रित किये रखता है। ये व्यक्ति को आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करता है और सफल बनाता है। हम में से हर एक ने अपने जीवन में समझदारी और जरुरत के अनुसार अनुशासन का अलग-अलग अनुभव किया है। जीवन में सही रास्ते पर चलने के लिये हर एक व्यक्ति में अनुशासन की बहुत जरुरत पड़ती है। अनुशासन के बिना जीवन बिल्कुल निष्क्रिय और निर्थक हो जाता है क्योंकि कुछ भी योजना अनुसार नहीं होता है। अगर हमें किसी भी प्रोजेक्ट को पूरा करने के बारे में अपनी योजना को लागू करना है तो सबसे पहले हमें अनुशासन में होना पड़ेगा। अनुशासन दो प्रकार का होता है एक वो जो हमें बाहरी समाज से मिलता है और दूसरा वो जो हमारे अंदर खुद से उत्पन्न होता है। हालाँकि कई बार, हमें किसी प्रभावशाली व्यक्ति से अपने स्व-अनुशासन आदतों में सुधार करने के लिये प्रेरणा की जरुरत होती है।

हमारे जीवन के कई पड़ावों पर बहुत से रास्तों पर हमें अनुशासन की जरुरत पड़ती है इसलिये बचपन से ही अनुशासन का अभ्यास करना अच्छा होता है। स्व-अनुशासन का सभी व्यक्तियों के लिये अलग-अलग अर्थ होता है जैसे विद्यार्थियों के लिये इसका मतलब है सही समय पर एकाग्रता के साथ पढ़ना और दिये गये कार्य को पूरा करना। हालाँकि काम करने वाले इंसान के लिये सुबह जल्दी उठना, व्यायाम करना, समय पर कार्यालय जाना और ऑफिस के कार्य को ठीक ढंग से करना। हर एक में स्व-अनुशासन की बहुत जरुरत है क्योंकि आज के आधुनिक समय में किसी को भी दूसरों को अनुशासन के लिये प्रेरित करने का समय नहीं है। बिना अनुशासन के कोई भी अपने जीवन में असफल हो सकता है, अनुशासन के बिना कोई भी इंसान कभी भी अपने अकादमिक जीवन या दूसरे कार्यों की खुशी नहीं मना सकता।

स्व-अनुशासन की जरुरत हर क्षेत्र में होती है जैसे संतुलित भोजन करना (मोटापे और बेकार खाने को नियंत्रित करना), नियमित व्यायाम (इसके लिये एकाग्रता की जरुरत है) आदि। गड़बड़ और अनियंत्रित खाने-पीने से किसी को भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ हो सकती हैं इसलिये स्वस्थ रहने के लिये अनुशासन की जरुरत है। अभिवावक को स्व-अनुशासन को विकसित करने की जरुरत है क्योंकि उसी से वो अपने बच्चों को एक अच्छा अनुशासन सिखा सकते हैं। उन्हें हर समय अपने बच्चों को प्रेरित करते रहने की जुरुरत पड़ती है जिससे वो दूसरों से अच्छा व्यवहार करें और हर कार्य को सही समय पर करें। कुछ शैतान बच्चे अपने माता-पिता के अनुशासन को नहीं मानते हैं, ऐसे वक्त में अभिभावकों को हिम्मत और धैर्य के साथ अपने बदमाश बच्चों को सिखाना चाहिये। प्रकृति के अनुसार अनुशासन को ग्रहण करने की सभी व्यक्ति का अलग समय और क्षमता होती है । इसलिये, कभी हार मत मानो और लगातार प्रयास करते रहो अनुशासन में होने को, छोटे-छोटे कदमों से ही बड़ी मंजिलें हासिल की जा सकती हैं।

 

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